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बà¥à¤°à¥‡à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• का आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में इलाज,
वाराणसी, जेà¤à¤¨à¤à¤¨à¥¤ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में मौजूद सेलà¥à¤¸ की जरूरत को पूरा करने के लिठहृदय से बà¥à¤°à¥‡à¤¨ तक लगातार रकà¥à¤¤ पहà¥à¤‚चता रहता है। जब रकà¥à¤¤ की आपूरà¥à¤¤à¤¿ में किसी कारण बाधा आती है, तो इससे आकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की आपूरà¥à¤¤à¤¿ रà¥à¤• जाती है और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की कोशिकाà¤à¤‚ मृत होने लगती हैं। परिणाम सà¥à¤µà¤°à¥‚प बà¥à¤°à¥‡à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• हो जाता है। यह कोई नई बीमारी नहीं है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में हजारों साल पहले ही इस बीमारी का वरà¥à¤£à¤¨ चरक संहित व सà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤ संहिता जैसे गà¥à¤°à¤‚थों में किया गया है।
राजकीय सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤•ोतà¥à¤¤à¤° आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ à¤à¤µà¤‚ चिकितà¥à¤¸à¤¾à¤²à¤¯-चौकाघाट सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कायचिकितà¥à¤¸à¤¾ à¤à¤µà¤‚ पंचकरà¥à¤® विà¤à¤¾à¤— के वैदà¥à¤¯ डा. अजय कà¥à¤®à¤¾à¤° के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ गà¥à¤°à¤‚थों में à¤à¤•ांग वात, पकà¥à¤·à¤µà¤§, सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गघात, अधरांगघात, अरà¥à¤¦à¤¿à¤¤ आदि नामों से बà¥à¤°à¥‡à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• के विविध रूपों का वरà¥à¤£à¤¨ किया गया है। शरीर के आधे या पूरे à¤à¤¾à¤— अथवा किसी अंग विशेष की चेतना या कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का समापà¥à¤¤ होना ही पकà¥à¤·à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ कहलाता है। पकà¥à¤· का अरà¥à¤¥ होता है अंग à¤à¤µà¤‚ घात का अरà¥à¤¥ होता है नाश या नषà¥à¤Ÿ होना। यानी शरीर के किसी अंग का घात होना या उसकी पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का नषà¥à¤Ÿ होना पकà¥à¤·à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ है। माडरà¥à¤¨ मेडिसिन में मोनोपà¥à¤²à¥‡à¤œà¤¿à¤¯à¤¾, बाईपà¥à¤²à¥‡à¤œà¤¿à¤¯à¤¾, टेटà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ जैसे शबà¥à¤¦ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ à¤à¤•ांग वात, पकà¥à¤·à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤, सरà¥à¤µà¤¾à¤‚ग वात, अधरांगवात जैसे रोगों का ही अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ नाम है।
इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के दिखने पर हो जाà¤à¤‚ सावधान
- अचानक बेहोश या संवेदनशूनà¥à¤¯ हो जाना।
- चेहरे, हाथ या पैर में, विशेष रूप से शरीर के à¤à¤• à¤à¤¾à¤— में कमजोरी आ जाना।
- समà¤à¤¨à¥‡ या बोलने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल होना।
- à¤à¤• या दोनों आंखों की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होना।
- चलने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल।
- चकà¥à¤•र आना।
- संतà¥à¤²à¤¨ की कमी होना।
- अचानक गंà¤à¥€à¤° सिरदरà¥à¤¦ होना।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में उपलबà¥à¤§ इलाज
- हजारों साल पहले से यह रोग आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के गà¥à¤°à¤‚थों में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ है तो जाहिर है इसकी चिकितà¥à¤¸à¤¾ à¤à¥€ होगी। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में इसके लिठऔषधियों के अलावा पंचकरà¥à¤® चिकितà¥à¤¸à¤¾ à¤à¥€ बताई गयी है। वात-वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• कषà¥à¤Ÿà¤ªà¥à¤°à¤¦ व चिकितà¥à¤¸à¤¾ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से कषà¥à¤Ÿà¤¸à¤¾à¤§à¥à¤¯ पकà¥à¤·à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ होता है। यह à¤à¤• चिरकालिक रोग है, जो अचानक उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है और इसके कारण रोगी को असहनीय कषà¥à¤Ÿ à¤à¥‡à¤²à¤¨à¥‡ पड़ते हैं। कà¥à¤› औषधियां हैं, जिनका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— चिकितà¥à¤¸à¤• की देखरेख में करने से बहà¥à¤¤ लाठमिलता है।
- à¤à¤•ांगवीर रस
- समीरपनà¥à¤¨à¤— रस
- वृहत वात चिंतामणि रस
- योगेंदà¥à¤° रस
- दशमूल कà¥à¤µà¤¾à¤¥
- महारासà¥à¤¨à¤¾à¤¦à¤¿ कà¥à¤µà¤¾à¤¥
इन बातों का रखें धà¥à¤¯à¤¾à¤¨
- नमक, कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤², टà¥à¤°à¤¾à¤‚स फैट और सेचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैट की कम मातà¥à¤°à¤¾ वाला और à¤à¤‚टी आकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट, विटामिन-ई, सी और ठकी अधिक मातà¥à¤°à¤¾ वाला à¤à¥‹à¤œà¤¨ लें।
- साबà¥à¤¤ अनाज खाà¤à¤‚, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह फाइबर के अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं और बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रखने में काफी फायदेमंद साबित होते हैं।
- ओमेगा फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ मसलन तैलीय मछलियां, अखरोट, सोयाबीन आदि अपने खाने में शामिल करें। यह कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤² को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं और बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के साथ हृदय की बीमारियों से बचाते हैं।
- टमाटर और गहरी हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जरूर खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनमें à¤à¤‚टी आकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट की मातà¥à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤ अधिक होती है।
- बहà¥à¤¤ तनाव न लें, मानसिक शांति के लिठधà¥à¤¯à¤¾à¤¨ लगाà¤à¤‚।
- धूमपान और शराब के सेवन से बचें।
- नियमित रूप से वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® और योग करें।
- अपना वजन नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रखें।
- हृदय व मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के रोगी अपने रोग के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सावधान रहें। जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ये रोग होते है उनमें सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• का खतरा दोगà¥à¤¨à¤¾ हो जाता है।
- सोडियम यानी नामक का अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में सेवन न करें। इससे बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° सही रहता है।
- बहà¥à¤¤ तीखे मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ के सेवन से बचें।
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